इस ब्लॉग में आपका स्वागत है, आज हम इस ब्लॉग में संघर्ष प्रेरक उद्धरण के बारे में पढ़ेंगे। संघर्ष हर किसी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें मजबूत और संकल्पवान बनाता है। कठिनाइयाँ हमें सिखाती हैं कि जीवन का परिचय कैसे देना चाहिए और आत्म-विश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर कैसे बढ़ना चाहिए।

जीवन में शांति चाहते हो तो,
दुसरों की शिकायतें करने से बेहतर है,
खुद को ही बदल लें।
ज़िंदगी” की “तपिश” को “सहन” किजिए “जनाब”,
अक्सर वे “पौधे” “मुरझा” जाते हैं,
जिनकी “परवरिश” “छाया” में होती हैं।
खुश रहने का मतलब ये नहीं कि
सब कुछ ठीक है
इसका मतलब ये है कि आपने
आपके दुखों से उपर उठकर
जीना सीख लिया है।
कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है,
लोग तो पीछे तब आते हैं जब आप कामयाब होने लगते हैं।”
अपने लक्ष्य के लिए जोशीले और जुनूनी बनिए…
विश्वास रखिए, परिश्रम का फल सफलता ही है…!”
घायल तो यहां हर परिंदा है,
मगर जो फिर से उड़ सका वहीं जिंदा है…”
एक दिन वर्षों का संघर्ष
बहुत खूबसूरत तरीके से तुमसे टकराएगा…”
“जो रातों को कोशिशों में गंवा देते हैं,
वहीं सपनों की चिंगारी को और हवा देते हैं”
उम्र थका नहीं सकती ठोकरें गिरा नहीं सकती, अगर जीत हो जितने की तो परिस्थितियां भी हरा नहीं सकती ।
ना थके है पैर अभी ना हारी है हिम्मत, हौसला है कुछ बड़ा करने का इसे अभी भी सफर जारी है।
नजरअंदाज करना सीख गया, खुद पर विश्वास करना सीख गया, एक न एक दिन सफल हो ही जाऊंगा, इसलिए लोगों की बातों को बर्दास्त करना सीख गया…
बस आप लगातार अपने मंजिल की ओर चलते रहिए, रास्ते आपको मिल ही जायेंगे।
अगर सफल होने का मेरा संकल्प काफी मजबूत है, तो सफलता मुझे कभी नहीं छोड़ेगी

जित और हार आपकी सोच पर निर्भर करती है !
मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जित होगी !
संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है,
जीवन की कठिनाइयों से लड़ना सिखाता है ।
खोल दे पंख मेरे कहता है परिंदा,
अभी और उड़ान बाकी है,
जमीन नहीं है, मंजिल मेरी,
अभी पूरा आसमान बाकी है !
पतझड़ हुए बिना पेड़ पर नए पत्ते नहीं आते !
ठीक उसी तरह परेशानी और कठिनाई !
सहे बिना इंसान के अच्छे दिन नहीं आते !
शब्द और व्यक्ति एक ही होते है,
बस अर्थ बदल जाते है,
जो हमसे मोहब्बत करते है उनके लिए हमेशा सही,
और जो लोग दिखावा करते है,
उनके लिए हमेशा गलत !