26+ god motivational quotes in hindi

God Quotes in Hindi: जब मैं रोज सुबह उठता हूं तो नए दिन के लिए भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं। भगवान ने हमें जीवन का उपहार दिया है; यह हम पर निर्भर है कि हम स्वयं को अच्छी तरह से जीने का उपहार कैसे दें सकते है।

ईश्वर का दर्शन कर लेने पर मनुष्य फिर जगत् (संसार) के जंजाल-में नहीं पड़ता, ईश्वर को छोड़कर एक क्षण भी उसे शान्ति नहीं मिलती, एक क्षण भी ईश्वर को छोड़ने में मृत्यु-कष्ट होता है।

जिसकी साधना करने की तीव्र उत्कण्ठा (इच्छा) होती है, भगवान उसके पास सद्गुरू भेज देते हैं। गुरू के लिए साधकों को चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

ईश्वर के अनन्त नाम है, अनन्त रूप हैं, अनन्त भाव हैं। उसे किसी नाम से, किसी रूप से और किसी भाव से कोई पुकारे वह सबकी पुकार सुन सकता है, वह सबकी मनः कामना पूरी कर सकता है।

पहले ईश्वर को प्राप्त करने की चेष्टा करो। गुरू का विश्वास करके कुछ कर्म करो। गुरू न हों तो भगवान् के पास कुल-प्राण से प्रार्थना करो। वह कैसे हैं यह उन्हीं की कृपा से मालूम हो जायगा।

कुलटा स्त्रियाँ माता-पिता तथा परिवार वालों के साथ रहकर संसार के सभी कार्य करती हैं, परंतु उनका मन सदा अपने यार में लगा रहता है, हे संसारी जीव। तुम भी मन को ईश्वर में लगाकर माता-पिता तथा परिवार का काम करते रहो।

पतंगा एक बार रोशनी देखने पर फिर अन्धकार में नहीं जाता, चींटियाँ गुड़ में प्राण दे देती हैं, पर वहाँ से लोटती नहीं। इसी प्रकार भक्त जब एक बार प्रभुदर्शन का रसास्वादंन कर लेते हैं, तो उसके लिये प्राण दे देते हैं, पर लौटते नहीं।

काजल की कोठरी में कितना भी बचकर रहो, कुछ न -कुछ कसौंस लगेगी ही। इसी प्रकार युवक-युवती परस्पर बहुत सावधानी के साथ रहें तो भी कुछ-न-कुछ काम जागेगा ही।

ईश्वर साकार-निराकार और क्या-क्या है, यह हमलोग नहीं जानते। तुम्हें जो अच्छा लगे उसी में विश्वास कर उसे पुकारो, तुम उसी के द्वारा उसें पाओगे।

मिसरी की डली चाहे जिस ओर से, चाहे जिस ढंग से तोड़कर खाओ मीठी ही लगेगी, उसी प्रकार मन सफेद कपडे के समान है, इसे जिस रंग में डुबाओगे वहीं रंग चढ़ जायगा।

मरने के समय मनमें जैसा भाव होता हैं, दूसरे जन्म में वैसी ही गति होती है, इसीलिये जीवन भर भगवान के स्मरण की आवश्यकता है, जिससे मुत्यु के समय केवल भगवान् ही याद आवें।

संसार में आकर भगवान के विषय में तर्क, युक्ति, विचार आदि करने से कुछ फल नहीं। जो प्रभु को प्राप्त कर आनन्दानुभव कर सकता है, वही धन्य है।

जो ईश्वर में नित्य डूबा रहता है, उसकी प्रेमाभक्ति कभी नहीं सूखती। परंतु दो-एक दिन की भक्ति से ही जो संतुष्ट तथा निश्चिन्त रहता है, सीके पर रखे हुए रिसते घडे के जल के समान वह भक्ति दो दिन बाद ही सूख जाती है।

भगवान को मंदिर से ज्यादा
मनुष्य का हृदय पसंद है,
क्योंकि मंदिर में इंसान की चलती है,
हृदय में भगवान की।

परमात्मा शब्द नहीं जो तुम्हें पुस्तक में मिलेगा,
परमात्मा मूर्ति नहीं जो तुम्हें मंदिर में मिलेगी,
परमात्मा मनुष्य नहीं जो तुम्हें समाज में मिलेगा,
परमात्मा जीवन है जो तुम्हें अपने भीतर मिलेगा।

ईश्वर कहते है,
उदास मत हो मैं तेरे साथ हूँ,
सामने तो नहीं आस – पास हूँ,
पलकों को बंद करो
और दिल से याद करो
कोई और नहीं तेरा विश्वास ही तो हूँ।

पकड़ लो हाथ मेरा प्रभु,सच्चा प्यार ईश्वर कि तरह होता है,
जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं,
लेकिन महसूस कुछ ही लोगों ने किया होता है।

मौन प्रार्थनाएँ जल्दी पहुँचती है भगवान तक,
क्योंकि वो शब्दों के बोझ से मुक्त होती है।

तुम्हारी किस्मत का लिखा तुम से कोई नहीं छीन सकता,
अगर भरोसा है रब पर तो तुम्हें वो भी मिलेगा,
जो तुम्हारा हो नहीं सकता।

बड़े नादान हैं,
वो लोग जो इस दौर मैं भी,
वफा की उम्मीद करते है,
यहाँ तो दुआ कबूल ना होने पर लोग,
भगवान तक बदल दिया करते है।

सफेद कपडे़ में थोड़ी भी स्याही का दाग पड़ने से वह दाग बहुत स्पष्ट दीखता है, उसी प्रकार पवित्र मनुप्यों का थोड़ा दोष भी अधिक दिखलायी देता है।

व्याकुल होकर उसके लिये रोने से ही ‘वह’ मिलता है। लोग लड़के-बच्चे के लिये, रूपये-पैसे के लिये कितना रोते हैं, कि भगवान् के लिये क्या कोई एक बूँद भी आँसू टपकाता है, उसके लिये रोओ, आँसू बहाओ, तब उसको पाओगे।

पहले संसार करके पीछे भगवान् की प्राप्ति की इच्छा करते हो। ऐसा न करके पहले भगवान् को लेकर पीछे संसार करने की इच्छा क्यों नहीं करते ? इससे बहुत सुख पाओगे।

ईश्वर का प्रेम पाकर मनुष्य सारी बाह्य वस्तुओं को भूल जाता है। जगत् का खयाल उसको नहीं रहता, यहाँ तक कि सबसे मय अपने शरीर को भी भूल जाता है। जब ऐसी अवस्था आवे सब समझना चाहिये कि प्रेम प्राप्त हुआ।

यह नश्वर देह किस काम आवेगी ? भगवन्! मुझे ऐसी प्रेमभक्ति दे कि मुँह से तेरा ही नाम अखण्ड रूप से लेता रहूँ। अपनी स्तुति और दूसरों की निन्दा, हे गोविन्द! मैं कभी न करूँ। सब प्राणियों में हे राम! मैं तुम्हे ही देखूँ और तेरे प्रसाद से ही सन्तुष्ट रहूँ।

जो स्थूल है वही सूक्ष्म है, दृश्य है वही अदृश्य है, व्यक्त है वही अव्यक्त है, सगुण है वही निर्गुण है, अंदर है वही बाहर है। भगवान् सर्वत्र हैं, पर जो भक्त नहीं हैं, उन्हे नहीं दिखायी देते। जलमें, थलमें, पत्थर में कहाँ नहीं हैं, जिधर देखो उधर ही भगवान् हैं, पर अभक्तों को केवल शून्य दिखायी देता है।
एकत्व के साथ सृष्टि को देखने से दृष्टि में भगवान् ही भर जाते हैं।

Leave a Comment